पेट्रोल ने तोड़ा महंगाई का रिकॉर्ड! ईरान-युद्ध के असर से देशभर में दामों में आग, कई शहरों में 100 पार
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी टकराव ने वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित कर दिया है, जिसके चलते देश में पेट्रोल(petrol price today)और डीजल की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। प्राइवेट सेक्टर की बड़ी कंपनी Nayara Energy ने ईंधन के दाम बढ़ाने का फैसला लिया है, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी
कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5.30 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इससे पहले ही एलपीजी सिलेंडर महंगे हो चुके थे, ऐसे में अब ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के खर्च पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट बना संकट की बड़ी वजह
दरअसल, इस पूरे संकट की जड़ Strait of Hormuz में पैदा हुई अस्थिरता है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। हालिया तनाव के कारण यहां टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।
पेट्रोल पंपों पर बढ़ी भीड़, कई जगह ‘नो स्टॉक’
भारत के कई शहरों में इसका असर दिखने लगा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कुछ जगहों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड भी देखने को मिल रहे हैं। लोग एहतियात के तौर पर ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे सप्लाई और दबाव में आ गई है।
इन शहरों में सबसे ज्यादा कीमत
अगर प्रमुख शहरों की बात करें तो Hyderabad में पेट्रोल 107.46 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि Kolkata में 105.41 रुपये और Mumbai में 103.54 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। वहीं Delhi में कीमत 94.77 रुपये और Chandigarh में 94.30 रुपये प्रति लीटर है।
रिफाइनरी बंद होने से बढ़ेगी चिंता
इस बीच एक और बड़ी चिंता सामने आई है। रूस की कंपनी Rosneft समर्थित Nayara Energy अपनी रिफाइनरी को करीब 35 दिनों के लिए बंद करने जा रही है। कंपनी का कहना है कि यह फैसला मेंटेनेंस के कारण लिया गया है, लेकिन इससे भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष ने बढ़ाई मुश्किलें
वैश्विक स्तर पर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। एक ओर ईरान से जुड़े तनाव के कारण सप्लाई बाधित है, वहीं Russia और Ukraine के बीच जारी संघर्ष ने तेल उत्पादन और निर्यात को प्रभावित कर दिया है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस की पाइपलाइन और टैंकरों को नुकसान पहुंचा है, जिससे उसकी निर्यात क्षमता पर असर पड़ा है।
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार
इन घटनाओं का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि WTI भी 92 डॉलर से ऊपर बना हुआ है।
आगे क्या होगा?
कुल मिलाकर, वैश्विक संकट का सीधा असर भारत के आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। अगर आने वाले दिनों में हालात नहीं सुधरे तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी के साथ-साथ ईंधन की किल्लत भी गहरा सकती है।

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