Laxman Sivaramakrishnan: काले रंग की सजा… इस भारतीय खिलाड़ी की कहानी जानकर चौंक जाएंगे आप
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के पूर्व लेग स्पिनर Laxman Sivaramakrishnan ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़ा ऐसा दर्द साझा किया है, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कमेंट्री से संन्यास लेने के बाद उन्होंने बताया कि कैसे रंगभेद ने उनके आत्मविश्वास, करियर और मानसिक स्थिति को गहराई से प्रभावित किया।
कमेंट्री करियर में भी झेलना पड़ा भेदभाव
शिवरामकृष्णन ने बताया कि 23 साल के लंबे कमेंट्री करियर के दौरान भी उन्हें बराबरी का अवसर नहीं मिला। उन्हें बड़े मैचों में टॉस या प्रस्तुति करने का मौका नहीं दिया जाता था। जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि वह “प्रेजेंटेबल” नहीं दिखते, जो उनके लिए बेहद आहत करने वाला था।
महान खिलाड़ियों से की तुलना, उठाए सवाल
उन्होंने इस सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि Vijay Amritraj जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी सांवले रंग के हैं, फिर भी उन्होंने दुनिया भर में सम्मान हासिल किया। इससे साफ है कि खेल में प्रतिभा और मेहनत मायने रखती है, न कि रंग।
अवसाद और डर ने बना दी थी जिंदगी मुश्किल
लगातार भेदभाव का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर रूप से पड़ा। उन्होंने बताया कि वह अवसाद में चले गए थे और हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें आईने में खुद को देखने से भी डर लगता था। हर समय उनके मन में मौत का ख्याल आता था और कभी-कभी चलती कार से कूदने जैसे खतरनाक विचार भी आते थे।
14 साल की उम्र से शुरू हुआ दर्द
शिवरामकृष्णन ने खुलासा किया कि यह भेदभाव उनके साथ बचपन से ही शुरू हो गया था। महज 14 साल की उम्र में एक सीनियर खिलाड़ी ने उन्हें मैदान का कर्मचारी समझ लिया था। इस घटना ने उनके आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित किया और यह सिलसिला आगे भी जारी रहा।
निजी जिंदगी पर भी पड़ा असर
उन्होंने बताया कि रंगभेद का असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा। उनकी छवि इस तरह प्रभावित हुई कि शादी जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
समाज के लिए बड़ा संदेश
Laxman Sivaramakrishnan की यह कहानी केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती है जहां आज भी रंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है। यह घटना इस बात का संकेत है कि अब समय आ गया है जब इस सोच को बदलने की जरूरत है।


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