गरियाबंद में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: 31 नक्सली ढेर, 29 ने छोड़ा हथियार, DGN नेटवर्क ध्वस्त


गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। लगातार ऑपरेशनों के बाद जिले में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को करारा झटका देते हुए 31 नक्सलियों को मार गिराया गया है, जबकि 29 माओवादियों ने पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण किया है। इस कार्रवाई के साथ ही क्षेत्र में सक्रिय DGN डिवीजन का भी अंत माना जा रहा है।


शीर्ष नक्सलियों का हुआ सफाया


मुठभेड़ों में कई बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया, जिनमें सेंट्रल कमेटी के सदस्य चलपति और मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्णना प्रमुख हैं। इनके अलावा अन्य वरिष्ठ कैडर भी सुरक्षाबलों की कार्रवाई में ढेर हुए।


रणनीतिक ऑपरेशन में मिली सफलता


गरियाबंद के घने जंगलों में सुरक्षाबलों ने योजनाबद्ध तरीके से कई बड़े अभियान चलाए:


25 जनवरी 2024: टोरीभुई-सिकासेर क्षेत्र में मुठभेड़, जिसमें नक्सली पार्वती मारी गई

19–23 जनवरी (पिछले वर्ष): बेसराझर-भालूडिग्गी पहाड़ियों में 5 दिन चली मुठभेड़, 16 नक्सली ढेर

11–12 सितंबर 2025: मेटाल-भालूडिग्गी क्षेत्र में ऑपरेशन, 10 माओवादी मारे गए


इन अभियानों में कई वांछित नक्सलियों का सफाया हुआ, जिससे संगठन की कमर टूट गई।


surrender से कमजोर हुआ नेटवर्क


सरकारी पुनर्वास नीति का असर भी दिखा है। अलग-अलग एरिया कमेटियों के 29 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।


उदंती एरिया कमेटी

एसडीके और सीनापाली एरिया कमेटी

सीतानदी एरिया कमेटी


इन सरेंडरों के बाद क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ काफी कमजोर हुई है।


भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद


सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए:


75 हथियार (ग्रेडेड और अन्य)

300 से अधिक डेटोनेटर और 14 IED

100 मीटर से अधिक कॉर्डेक्स वायर

89 BGL सेल

₹1.08 करोड़ से ज्यादा नकदी


इलाके में लौट रहा सामान्य जीवन


लगातार कार्रवाई और आत्मसमर्पण के बाद गरियाबंद जिले में नक्सल प्रभाव काफी हद तक खत्म होने का दावा किया जा रहा है। सुरक्षा बलों की इस सफलता के बाद क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

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