पीरियड लीव पर बड़ा फैसला: हर महीने एक दिन की छुट्टी अनिवार्य, हाई कोर्ट ने दिया सख्त निर्देश

 पीरियड लीव पर बड़ा फैसला: हर महीने एक दिन की छुट्टी अनिवार्य, हाई कोर्ट ने दिया सख्त निर्देश  


कर्नाटक उच्च न्यायालय ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाते हुए मासिक धर्म अवकाश को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि पीरियड्स महिलाओं के जीवन के अधिकार से सीधे जुड़े हैं और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हर महीने मिलेगा एक दिन का सवेतन अवकाश  

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दिसंबर 2025 से लागू की गई नीति को पूरी गंभीरता से लागू किया जाए। इसके तहत 18 से 52 वर्ष की महिला कर्मचारियों को हर महीने एक दिन का पेड लीव मिलेगा। यानी सालभर में अधिकतम 12 दिन की छुट्टी का प्रावधान रहेगा।

अनुच्छेद 21 से जुड़ा अधिकार  

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है। साथ ही अनुच्छेद 14 के तहत समानता के तर्क को खारिज करते हुए कहा गया कि जैविक भिन्नताओं को स्वीकार करना ही वास्तविक समानता है।

असंगठित क्षेत्र पर खास जोर  

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि यह सुविधा सिर्फ बड़े संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि होटल, दुकान और छोटे निजी प्रतिष्ठानों में भी सख्ती से लागू की जाए। प्रशासनिक दिक्कतों को बहाना नहीं माना जाएगा।

याचिका के बाद आया फैसला  

यह मामला बेलगावी की एक महिला कर्मचारी की याचिका के बाद सामने आया, जिसमें बताया गया था कि छोटे संस्थानों में इस नीति का पालन नहीं हो रहा है। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए सख्त रुख अपनाया।

नया कानून लाने की तैयारी  

राज्य सरकार अब एक अलग कानून लाने की तैयारी में है, जिसमें छात्राओं को भी शामिल किया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान भी जोड़ा जाएगा। यह फैसला महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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