CG Teacher News: क्या सच में खत्म होगा अटैचमेंट का खेल? डीपीआई के आदेश के बाद बढ़ी उम्मीद, लेकिन कई सवाल अब भी बरकरार
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों और कर्मचारियों के अटैचमेंट (संलग्नीकरण) को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) और संयुक्त संचालकों (जेडी) की बैठक में साफ शब्दों में कहा कि कार्यालयों में अटैच किए गए शिक्षकों और कर्मचारियों को उनके मूल स्कूल और पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाए। उनका कहना है कि जिस कर्मचारी की जहां ड्यूटी है, उसे वहीं काम करना चाहिए।
मंत्री के निर्देश के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने प्रदेशभर के सभी डीईओ और जेडी को पत्र जारी कर अपने-अपने जिले में अटैच कर्मचारियों और शिक्षकों की जानकारी मांगी है। इससे शिक्षा विभाग में हलचल जरूर बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही कई बड़े सवाल भी खड़े हो गए हैं।
दरअसल, जून 2025 में राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त किए जाएंगे। इसके बावजूद पिछले एक साल में कई जिलों में शिक्षकों और कर्मचारियों का अटैचमेंट लगातार जारी रहा। विभाग से जुड़े लोगों का आरोप है कि कई जगहों पर नियमों की अनदेखी कर कार्यालयों में संलग्नीकरण किया गया। यहां तक कि कुछ मामलों में पैसे लेकर अटैचमेंट करने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि जब सरकार पहले ही अटैचमेंट खत्म करने का आदेश दे चुकी थी, तब इतने लंबे समय तक यह व्यवस्था कैसे चलती रही। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? कई लोगों का मानना है कि डीपीआई को सिर्फ वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगने के बजाय जून 2025 से जून 2026 तक जारी हुए सभी अटैचमेंट आदेशों की समीक्षा भी करनी चाहिए।
बिलासपुर जिले का उदाहरण भी इस चर्चा के केंद्र में है। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कई शिक्षक, व्याख्याता और प्रधान पाठक वर्षों से अटैच होकर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनके मूल स्कूलों में छात्रों को शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार वास्तव में अटैचमेंट की व्यवस्था खत्म होगी या फिर यह आदेश भी केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। यदि विभाग गंभीरता से कार्रवाई करता है तो बड़ी संख्या में शिक्षक अपने स्कूलों में लौटेंगे और जहां शिक्षकों की कमी है, वहां विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। वहीं, यदि कार्रवाई नहीं हुई तो अटैचमेंट का यह विवाद आगे भी शिक्षा विभाग के लिए बड़ा मुद्दा बना रहेगा।

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