CG Holi Festival: CG के इस गांव में पंचांग नहीं, परंपरा से तय होती है होली की तारीख

 CG Holi Festival: CG के इस गांव में पंचांग नहीं, परंपरा से तय होती है होली की तारीख


आमतौर पर होली फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि पर मनाई जाती है, लेकिन Chhattisgarh के एक गांव में यह परंपरा अलग अंदाज में निभाई जाती है। Salheona नाम का यह गांव अपनी विशिष्ट मान्यता के लिए जाना जाता है। यहां होली की तारीख पंचांग से नहीं, बल्कि सप्ताह के दिन से तय होती है। यह परंपरा लगभग 100 वर्षों से चली आ रही है और आज भी ग्रामीण इसे पूरी निष्ठा से निभाते हैं।

कहां स्थित है यह गांव

यह गांव Raigarh से करीब 45 किलोमीटर दूर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक में स्थित है। छोटा सा यह गांव हर साल चर्चा में आ जाता है, जब यहां होली केवल मंगलवार या शनिवार को ही मनाई जाती है। यदि त्योहार इन दो दिनों के अलावा किसी और दिन पड़ता है, तो गांव में न तो होलिका दहन होता है और न ही गुलाल उड़ता है।

मंगलवार और शनिवार ही क्यों?

गांव के बुजुर्गों के अनुसार, पुराने समय में होली के आसपास अक्सर आग लगने की घटनाएं होती थीं। एक घर में लगी आग देखते-देखते कई घरों तक पहुंच जाती थी। उस दौर में ज्यादातर मकान कच्चे थे, जिससे नुकसान ज्यादा होता था। लगातार हो रही इन घटनाओं से परेशान ग्रामीणों ने आपसी सहमति से निर्णय लिया कि होली केवल मंगलवार या शनिवार को ही मनाई जाएगी और उससे पहले विधिवत पूजा-पाठ किया जाएगा।

पूजा के बाद ही उड़ता है गुलाल

जब होली इन निर्धारित दिनों में आती है, तो एक दिन पहले पूरे विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है। अगले दिन सुबह गांव के मंदिर में पूजा, हवन और पूर्णाहुति होती है। धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद ही लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हैं। दोपहर से शाम तक रंग खेलने का उत्साह पूरे गांव में दिखाई देता है।

परंपरा में आस्था और सुरक्षा का संदेश

ग्रामीणों का मानना है कि इस नियम का पालन करने से आगजनी की घटनाएं बंद हो गईं। उनके लिए यह केवल त्योहार नहीं, बल्कि पूर्वजों की सीख और सामूहिक निर्णय का सम्मान है। बदलते समय में भी साल्हेओना गांव अपनी इस अनोखी परंपरा को संजोए हुए है, जो आस्था के साथ-साथ एकजुटता का भी संदेश देती है।

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