रायपुर| छत्तीसगढ़ का एकमात्र मीडिया विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) इन दिनों फैकल्टी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। आलम यह है कि यूनिवर्सिटी के कई नियमित प्रोफेसर्स और फैकल्टी मेंबर्स सालों से दूसरे विभागों और बड़े संस्थानों में प्रतिनियुक्ति (Deputation) का मलाईदार आनंद ले रहे हैं। बार-बार के नोटिस और राजभवन के कड़े रुख के बाद भी ये शिक्षक अपने मूल विभाग में वापस आकर पढ़ाने को तैयार नहीं हैं।
खबर के मुख्य बिंदु
* सिस्टम बेअसर: कुशाभाऊ ठाकरे जनसंचार विश्वविद्यालय में नियमित प्रोफेसरों की संख्या घटकर रह गई सिर्फ 5।
* अतिथि शिक्षकों का सहारा: गेस्ट फैकल्टी के भरोसे चल रही हैं मीडिया के छात्रों की कक्षाएं और शैक्षणिक गतिविधियां।
* रसूखदारों की जिद: 6 से ज्यादा फैकल्टी मेंबर्स डेपुटेशन पर बाहर, नोटिस के बावजूद अब तक केवल 2 ही लौटे वापस।
* अल्टीमेटम बेअसर: कुलाधिपति (राज्यपाल) के वापसी आदेश को भी हवा में उड़ा रहे रसूखदार प्रोफेसर।
चांसलर (राज्यपाल) की सख्ती भी साबित हुई नाकाफी
विश्वविद्यालय के जानकारों का कहना है कि कैंपस में पढ़ाई का स्तर प्रभावित होने के कारण प्रशासन कई बार इन प्रोफेसर्स को वापसी का नोटिस जारी कर चुका है। बात जब राजभवन तक पहुँची, तो स्वयं राज्यपाल (कुलाधिपति) ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सभी शिक्षकों को तत्काल मूल संस्था में योगदान देने का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद मैदानी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और अधिकांश प्रोफेसर लौटने का नाम नहीं ले रहे हैं।
पढ़ाने की बजाय कुलपति निवास के चक्कर काट रहे प्रोफेसर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वापसी का कड़ा नोटिस मिलने के बाद भी ये फैकल्टी सदस्य यूनिवर्सिटी में जॉइनिंग देने की बजाय केवल लॉबिंग में जुटे हैं। वर्तमान में कुलपति पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय कैंपस स्थित अपने निवास पर रह रहे हैं। नोटिस से घबराए कुछ रसूखदार प्रोफेसर सीधे कुलपति निवास पर उनसे व्यक्तिगत मुलाकात करने पहुँच रहे हैं, ताकि किसी तरह प्रतिनियुक्ति की अवधि को और आगे बढ़ाया जा सके।
भगवान भरोसे पत्रकारिता के भविष्य
कुलपति ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि कई फैकल्टी सदस्य वापस अपनी मूल संस्था में आकर सेवाएं नहीं देना चाहते हैं। वर्तमान में चुनिंदा 5 परमानेंट टीचर्स के भरोसे पूरा विवि चल रहा है, जिसके कारण अधिकांश कक्षाएं और जरूरी शैक्षणिक कार्य अतिथि शिक्षकों (Guest Faculty) के सहारे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि प्रदेश के सबसे बड़े मीडिया संस्थान से निकलने वाले छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

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