Railway News: अब आपातकाल में स्टेशन मास्टर खुद खोल सकेंगे 'सिग्नल कंट्रोल रूम', आगजनी से निपटने बदला वर्षों पुराना नियम

 


रायपुर | रेल हादसों को रोकने और ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को लेकर रेलवे बोर्ड ने एक बेहद महत्वपूर्ण नियम में बदलाव किया है। स्टेशन के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील हिस्से यानी 'रिले रूम' (सिग्नल कंट्रोल रूम) में आग या धुआं उठने जैसी आपातकालीन स्थितियों में अब चाबी के लिए तकनीकी टीम का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रेलवे ने अब स्टेशन मास्टर को 'मास्टर की' (Master Key) सौंपने का फैसला किया है, ताकि वक्त रहते बड़े नुकसान को टाला जा सके।

क्यों इतना महत्वपूर्ण है 'रिले रूम

आम जनता की भाषा में कहें तो रिले रूम किसी भी रेलवे स्टेशन का 'दिमाग' होता है। यहीं से तय होता है कि किस ट्रेन को लाल या हरा सिग्नल मिलेगा और कौन सी ट्रेन किस प्लेटफॉर्म पर आकर रुकेगी। सुरक्षा के मद्देनजर यह कमरा हमेशा 'डबल लॉक' में पूरी तरह बंद रहता है। पुराने नियमों के तहत तकनीकी टीम (S&T स्टाफ) की गैर-मौजूदगी में इस कमरे को खोलना पूरी तरह प्रतिबंधित था, लेकिन अब इस जटिल नियम को लचीला बना दिया गया है।

मथुरा स्टेशन की लापरवाही के बाद जागा रेलवे बोर्ड

रेलवे बोर्ड ने यह सख्त कदम पिछले महीने (16 अप्रैल) मथुरा रेलवे स्टेशन के पास हुई एक गंभीर घटना के बाद उठाया है। वहाँ रिले रूम में अचानक आग लग गई थी, लेकिन नियम आड़े आने और चाबी मिलने में देरी के चलते पूरा सिग्नल सिस्टम जलकर खाक हो गया था। इस एक चूक की वजह से घंटों तक दर्जनों यात्री ट्रेनें जहाँ-तहाँ फंसी रहीं। इसी से सबक लेते हुए रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सिग्नल) रामेश्वर मीना ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

खोलते ही करनी होगी एंट्री, काम के बाद दोबारा होगी सीलिंग

नए प्रोटोकॉल के मुताबिक, स्टेशन मास्टर जैसे ही इमरजेंसी में सील तोड़कर दरवाजा खोलेंगे, उन्हें इसकी तत्काल लिखित जानकारी 'रिले रूम रजिस्टर' में दर्ज करनी होगी। इसके बाद जैसे ही तकनीकी स्टाफ (एसएंडटी टीम) मौके पर पहुँचेगा, वे स्थिति को संभालेंगे और काम पूरा होने के बाद कंट्रोल रूम को दोबारा पूरी सुरक्षा के साथ सील कर दिया जाएगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ