CG में डीजल संकट से हाहाकार! खेतों में बंद हुए ट्रैक्टर, किसानों को खींचकर पहुंचना पड़ा SDM दफ्तर

 CG में डीजल संकट से हाहाकार! खेतों में बंद हुए ट्रैक्टर, किसानों को खींचकर पहुंचना पड़ा SDM दफ्तर


बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में डीजल-पेट्रोल की भारी किल्लत ने अब सीधे खेती-किसानी को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि किसानों को डिब्बे में डीजल लेने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना एसडीएम (SDM) की परमिशन के पेट्रोल पंप से डीजल या पेट्रोल डिब्बों में उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

खेतों में बंद हुए ट्रैक्टर, किसानों की बढ़ी मुश्किलें

ईंधन की कमी के कारण खेतों में काम कर रहे कई ट्रैक्टर बीच में ही बंद हो गए। डीजल खत्म होने के बाद किसान मजबूरी में अपने ट्रैक्टरों को खींचकर एसडीएम कार्यालय तक ले जाने को मजबूर हो गए, ताकि अनुमति पत्र प्राप्त कर डीजल लिया जा सके।

इस स्थिति से किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई किसान एसडीएम कार्यालय पहुंचे और व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

“आदेश के बिना डीजल नहीं” – प्रशासनिक सख्ती बनी परेशानी

इन्द्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने बताया कि खेती के सीजन की तैयारियों के बीच डीजल की अनुपलब्धता ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। उनके अनुसार, कई ट्रैक्टर खेतों में काम करते समय डीजल खत्म होने से रुक गए।

उन्होंने बताया कि केवल 5 लीटर डीजल लेने के लिए भी उन्हें पंप पर जाना पड़ा, लेकिन एसडीएम की अनुमति के बिना डीजल नहीं दिया गया।

किसानों का आरोप – समय और पैसे दोनों की बर्बादी

किसानों का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया इतनी जटिल हो गई है कि इसमें उनका समय, मेहनत और पैसा तीनों बर्बाद हो रहा है। खेती के महत्वपूर्ण समय में यह व्यवस्था बड़ी बाधा बन रही है।

सरल व्यवस्था की मांग

किसानों ने मांग की है कि कृषि कार्य के लिए डिब्बे में डीजल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल और तेज किया जाए, ताकि खेती का काम प्रभावित न हो। चेतावनी दी जा रही है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में बस्तर में हालात और बिगड़ सकते हैं।

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