रायपुर। बस्तर के प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात में मानसून के दौरान पर्यटकों की लापरवाही का मामला सामने आया है। लगातार बारिश के कारण जलप्रपात का पानी तेजी से बढ़ रहा था, इसके बावजूद कुछ पर्यटक प्रतिबंधित और खतरनाक हिस्सों में पहुंचकर नहाते नजर आए। इस दौरान उन्हें रोकने पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों के साथ विवाद हो गया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक वनकर्मी द्वारा डंडा चलाने की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोग पर्यटकों की सुरक्षा और वन विभाग की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
समझाइश के बाद भी नहीं माने पर्यटक
जानकारी के मुताबिक, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात में बारिश के मौसम में सुरक्षा के लिए कई स्थानों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। वन विभाग की टीम लगातार पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर रहने और खतरनाक हिस्सों में नहीं जाने की सलाह देती है।
बताया जा रहा है कि कुछ पर्यटक चेतावनी के बावजूद चट्टानों पर उतरकर नहाने लगे। कर्मचारियों ने उन्हें कई बार वहां से हटने के लिए कहा, लेकिन बात नहीं मानने पर विवाद की स्थिति बन गई।
वन विभाग ने बताई सुरक्षा को प्राथमिकता
मामले को लेकर रेंजर नीतू ठाकुर ने बताया कि जलप्रपात में बारिश के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और निगरानी की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का उद्देश्य केवल लोगों को खतरे वाले स्थान से हटाना था। इसी दौरान पर्यटकों और स्टाफ के बीच बहस हो गई। मामले की जानकारी संबंधित पुलिस थाने को भी दी गई है।
मानसून में बढ़ जाता है हादसों का खतरा
तीरथगढ़ जलप्रपात में हर साल बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन पहाड़ी इलाकों में अचानक पानी बढ़ने और फिसलन भरी चट्टानों के कारण खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
वन विभाग लगातार लोगों से अपील करता है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें। छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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