कोयला खदान को लेकर विवाद, पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल, जानिए क्या है पूरा मामला..
रायगढ़। जिले के तमनार ब्लॉक के नागरमुड़ा क्षेत्र में कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पर्यावरण से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि खदान परियोजना के लिए तय अनुमति से ज्यादा पेड़ों की कटाई की गई है, जिससे इलाके के पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
अनुमति से ज्यादा पेड़ काटने का आरोप
पर्यावरण प्रेमियों का दावा है कि नागरमुड़ा क्षेत्र में पिछले एक महीने के दौरान करीब 40 हजार से ज्यादा पेड़ काट दिए गए हैं, जबकि वन विभाग से लगभग 16 हजार पेड़ों की कटाई की अनुमति मिली थी। आरोप है कि इस दौरान कई कीमती सौगान और प्रतिबंधित सरई के पेड़ भी काटे गए।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
जन चेतना मंच के संयोजक राजेश त्रिपाठी ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि खदान प्रबंधन ने अनुमति की सीमाओं का पालन नहीं किया। उनका आरोप है कि हरे-भरे जंगल वाले क्षेत्र को मशीनों की मदद से पूरी तरह साफ कर दिया गया है, जिससे स्थानीय पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कोयला खदान क्षेत्र में नागरमुड़ा भी शामिल है। इस इलाके में बड़ी संख्या में सरई और सौगान जैसे महत्वपूर्ण पेड़ मौजूद थे। उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई के दौरान वन विभाग की मौजूदगी के बावजूद इतनी बड़ी कार्रवाई कैसे हुई, यह जांच का विषय है।
सरई पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल
राजेश त्रिपाठी ने कहा कि सरई जैसे संरक्षित पेड़ों की कटाई को लेकर नियम स्पष्ट हैं। ऐसे में इन पेड़ों को काटने की अनुमति किस आधार पर दी गई, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
फिलहाल पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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