रायपुर। जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव तक पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन नवा रायपुर के बंजारी गांव की तस्वीर कुछ और कहती है। यहां 2 साल पहले बनी पानी टंकी आज तक खाली पड़ी है। न टंकी में पानी चढ़ा, न लोगों के घरों तक नल पहुंचा।
लापरवाही का आलम ये कि पहले बिना भू-जल जांच के टंकी खड़ी कर दी गई। जब पानी नहीं निकला तो 1 किलोमीटर दूर नई जगह बोरिंग शुरू कर दी, वो भी एनआरडीए की जमीन पर। अब वहां सड़क बनने वाली है, इसलिए बोरिंग बीच में ही बंद करानी पड़ी।
जांच के बिना खड़ी कर दी टंकी
बंजारी गांव चेरिया पंचायत के अधीन आता है। करीब 2 साल पहले यहां जल जीवन मिशन के तहत टंकी और पाइप लाइन का काम पूरा हुआ। लेकिन जिस जगह टंकी बनाई गई, वहां पहले से ही पानी का लेवल काफी नीचे था। नतीजा बोर फेल हो गया।
ग्राम सरपंच ने बताया, "टंकी बन गई, पाइप भी बिछ गए, लेकिन डेढ़ साल से इसमें एक बूंद पानी नहीं आया। गर्मी में हालत सबसे खराब हो जाती है।"
एनआरडीए की जमीन पर हुआ खर्च, काम रुका
पानी की समस्या को देखते हुए करीब 2 महीने पहले इंजीनियरों ने टंकी से 1 किमी दूर नई बोरिंग कराने का फैसला लिया। इसके लिए पाइप लाइन भी बिछा दी गई और मोटा खर्च कर दिया गया।
लेकिन बाद में पता चला कि चयनित जगह *एनआरडीए की भूमि* है। एनआरडीए की टीम जब निरीक्षण पर आई तो उन्होंने काम रुकवा दिया, क्योंकि वहां प्रस्तावित सड़क निकलनी है। अब बोरिंग अधूरी है और टंकी फिर खाली।
आधे गांव को अब तक नहीं मिले कनेक्शन
गांव में पाइप लाइन तो डाल दी गई, लेकिन *आधी आबादी के घरों में नल कनेक्शन ही नहीं लगे। लोग आज भी हैंडपंप और टैंकर पर निर्भर हैं। सरपच का कहना है, "गर्मी में कूलर तक के लिए पानी नहीं मिलता। पंखे से रात गुजारनी पड़ती है। कागजों में सब पूरा दिख रहा है, पर जमीन पर कुछ नहीं।"
बंजारी के आसपास के गांवों में भी यही हाल है। टंकी-पाइप बन गईं, पर पानी नहीं। जल जीवन मिशन का मकसद हर घर नल से जल था, लेकिन प्लानिंग की कमी से बंजारी के लोग आज भी बूंद-बूंद को मोहताज हैं।


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