हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रेलर ने मवेशियों को कुचला, 9 की मौत; लगातार बढ़ रहे हादसों पर उठे सवाल

 हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रेलर ने मवेशियों को कुचला, 9 की मौत; लगातार बढ़ रहे हादसों पर उठे सवाल



बिलासपुर। 05 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक बार फिर तेज रफ्तार वाहन ने सड़क पर घूम रहे मवेशियों की जान ले ली। बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर मंगलवार को एक ट्रेलर ने मवेशियों के झुंड को कुचल दिया। हादसे में 9 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक नंदी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना कोनी थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।

हाईवे पर मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी

मवेशियों के सड़क हादसों में मारे जाने की यह एक साल के भीतर चौथी बड़ी घटना है। इससे पहले जुलाई 2025 में मस्तूरी-रायपुर नेशनल हाईवे पर अज्ञात वाहन ने 23 गायों को कुचल दिया था, जिसमें 18 गायों की मौत हुई थी।

इसके बाद बिलासपुर-रायपुर हाईवे पर एक ट्रक ने 15 गायों को रौंद दिया था, जिसमें सभी गायों की जान चली गई थी। वहीं सितंबर 2025 में रतनपुर रोड पर हुए हादसे में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से 8 गायों की मौत हुई थी। इस घटना में एक गर्भवती गाय भी शामिल थी।

ग्रामीणों और गौसेवकों ने किया रेस्क्यू

हादसे के बाद बुधवार सुबह गतौरी के पास ग्रामीणों और राहगीरों ने सड़क पर घायल और मृत मवेशियों को देखा। इसके बाद पुलिस और गौसेवकों को सूचना दी गई।

मौके पर पहुंची टीम ने घायल नंदी को रेस्क्यू कर छतौना स्थित गौरी गोपाल गौसेवा धाम पहुंचाया, जहां उसका इलाज किया जा रहा है। वहीं मृत 9 मवेशियों का गौसेवकों की मदद से अंतिम संस्कार किया गया।

हाईकोर्ट भी जता चुका है नाराजगी

सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई जारी है। इससे पहले भी हाईकोर्ट ने सड़क हादसों को लेकर राज्य सरकार और एनएचएआई को फटकार लगाई है।

कोर्ट ने मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसके बावजूद हाईवे पर मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

फेंसिंग और गौ एम्बुलेंस की मांग

घटना के बाद सामाजिक संगठनों और गौसेवकों ने हाईवे पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे गौ सुरक्षा फेंसिंग लगाने, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में स्पीड लिमिट तय करने और प्रत्येक जिले में गौ एम्बुलेंस की व्यवस्था करने की मांग रखी है।

गौसेवकों का कहना है कि आवारा मवेशियों के लिए स्थायी शेड और चारे की व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि उन्हें सड़कों पर आने से रोका जा सके और इस तरह के हादसों पर लगाम लगाई जा सके।

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