Durg University Account hacked: तीसरी बार हैक हुई दुर्ग विश्वविद्यालय की वेबसाइट: पाक
हैकरों का साइबर हमला, पीएम पर अपशब्द और 'पाकिस्तान जिंदाबाद'
के नारे
दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की
आधिकारिक वेबसाइट एक बार फिर हैकिंग का शिकार बनी है. सोमवार को छात्रों ने जब
विश्वविद्यालय की वेबसाइट खोली,
तो वहां पाकिस्तान जिंदाबाद के नारों और
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा में लिखे पोस्टर दिखाई दिए.
बताया जा रहा है कि इस बार भी हमले के पीछे पाकिस्तानी हैकर्स का हाथ है.
यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी
से वायरल हो गया, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन की साइबर सुरक्षा व्यवस्था
पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. इस घटना ने सिर्फ तकनीकी लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि यह भी
साफ किया है कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट बार-बार साइबर हमलों का आसान निशाना बनती
जा रही है.
तीन महीनों में तीसरी बार हुई हैकिंग
विशेष बात यह है कि यह घटना बीते तीन महीनों
में तीसरी बार हुई है.
- पहली बार वेबसाइट 7 जुलाई 2025 को हैक हुई थी.
- दूसरी बार 7 सितंबर 2025 को फिर से हमला हुआ.
- और अब तीसरी बार, 8 सितंबर 2025 को फिर से वही
कहानी दोहराई गई.
लगातार हो रही इन घटनाओं से छात्रों का
गुस्सा भी चरम पर है. परीक्षाओं के परिणाम, एडमिशन प्रक्रिया और अन्य जरूरी शैक्षणिक
जानकारी इसी वेबसाइट के जरिए दी जाती है, ऐसे में हैकिंग के कारण छात्रों का शैक्षणिक
कामकाज पूरी तरह से ठप हो जाता है.
निजी एजेंसी की भूमिका पर सवाल
वेबसाइट की देखरेख की जिम्मेदारी एक निजी
आईटी एजेंसी को सौंपी गई है. लेकिन लगातार तीसरी बार हैकिंग की घटना से एजेंसी की
कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. छात्रों का कहना है कि पहले भी सुरक्षा चूक के
बाद प्रशासन ने एनआईसी से वेबसाइट की ऑडिट कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक
इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
प्रशासन का दावा, अब होगी कड़ी कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया है कि
इस बार वेबसाइट की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.
हालांकि, छात्र यह मांग कर रहे हैं कि अब वेबसाइट का संचालन किसी सरकारी और तकनीकी
रूप से सक्षम एजेंसी को सौंपा जाए,
ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका
जा सके.
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है
कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है, जबकि यह देश
की प्रतिष्ठा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मसला बन चुका है.


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