महतारी वंदन योजना में बड़ी चूक: पुरुष के खाते में पहुंचती रही सहायता राशि, अब उठे सत्यापन पर सवाल

 महतारी वंदन योजना में बड़ी चूक: पुरुष के खाते में पहुंचती रही सहायता राशि, अब उठे सत्यापन पर सवाल

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना में खैरागढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने योजना की जांच और सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम मुढ़ीपार के एक युवक के आवेदन को पात्र मानते हुए उसके बैंक खाते में कई महीनों तक योजना की राशि जमा होती रही। बाद में मामला सामने आने पर विभाग ने राशि वापस जमा करा ली, लेकिन पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस शुरू हो गई है।

आवेदन में स्पष्ट गलती, फिर भी मिली मंजूरी

जानकारी के अनुसार मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू के नाम से महतारी वंदन योजना के लिए आवेदन किया गया था। हैरानी की बात यह रही कि आवेदन में हितग्राही और पति—दोनों के नाम के स्थान पर तिलोक साहू का ही नाम दर्ज था। इसके बावजूद आवेदन संबंधित स्तरों पर जांच के बाद स्वीकृत हो गया। जबकि यह योजना केवल पात्र महिलाओं के लिए संचालित की जाती है।

करीब एक साल तक मिलती रही राशि

आवेदन स्वीकृत होने के बाद लाभार्थी के खाते में लगभग एक वर्ष तक योजना की किस्तें आती रहीं। बाद में गड़बड़ी उजागर होने पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने कार्रवाई करते हुए भुगतान की गई राशि की रिकवरी कर ली।

हितग्राही ने दी यह सफाई

तिलोक साहू का कहना है कि वह एक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित करता है। योजना शुरू होने के दौरान पोर्टल की प्रक्रिया समझने और परीक्षण के उद्देश्य से उसने आवेदन किया था। उसके अनुसार उसके खाते में करीब 10 हजार रुपये आए थे, जिन्हें विभाग के निर्देश के बाद वापस जमा करा दिया गया।

जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने पुष्टि की कि संबंधित राशि वापस ले ली गई है। हालांकि इस मामले ने विभागीय सत्यापन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आवेदन को सत्यापित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होती है या मामला केवल राशि की रिकवरी तक ही सीमित रह जाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ