Meta ने पीएम मोदी की पोस्ट हटने पर मांगी माफी, सरकार ने उठाए सवाल; कंटेंट मॉडरेशन और सुरक्षा पर होगी जांच
नई दिल्ली। 06 अगस्त 2026। सोशल मीडिया कंपनी Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में भारत सरकार से माफी मांगी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, Meta ने माना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कुछ गलतियां हुई हैं। इनमें चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM), डीपफेक और अन्य संवेदनशील कंटेंट को लेकर हुई चूक भी शामिल है।
यह मामला उस समय सामने आया था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक वीडियो पोस्ट कुछ समय के लिए फेसबुक से हट गई थी। बाद में Meta ने उसे दोबारा बहाल कर दिया था और इसे तकनीकी गलती बताया था।
पीएम मोदी की पोस्ट हटने पर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, 23 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए एक वीडियो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शेयर किया था। इस वीडियो में उन्होंने पेपर लीक की समस्या पर चिंता जताई थी और कहा था कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने पेपर लीक जैसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात भी कही थी। लेकिन कुछ समय बाद यह वीडियो फेसबुक से हट गया। पोस्ट हटने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार ने Meta से जवाब मांगा।
बाद में Meta ने वीडियो को फिर से प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिया और इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया।
IT मंत्रालय ने Meta से मांगा जवाब
Meta की ग्लोबल टीम ने कंपनी के ग्लोबल अफेयर्स चीफ जोएल कैपलन के नेतृत्व में केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव और IT सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की।
बैठक में सरकार ने Meta से कई मुद्दों पर जवाब मांगा। इसमें कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम, वीआईपी अकाउंट की सुरक्षा, डीपफेक कंटेंट, बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट और भारतीय कानूनों के पालन जैसे विषय शामिल रहे।
सरकार का कहना है कि Meta केवल एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि वह अपने एल्गोरिदम के जरिए यह तय करती है कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा। इसलिए कंपनी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
सरकार ने सेफ हार्बर नियमों पर भी उठाए सवाल
बैठक में सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया कंपनियां IT कानून के तहत मिलने वाली सुरक्षा का लाभ तभी ले सकती हैं, जब वे भारतीय नियमों का पालन करें।
सरकार ने Meta को साफ किया कि प्लेटफॉर्म पर गलत या गैरकानूनी कंटेंट को रोकने के लिए कंपनी को प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी।
इसके अलावा Meta से यह भी पूछा गया कि उसके सिस्टम में ऐसी गलतियां कैसे हुईं और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
Meta ने मानी कंटेंट मॉडरेशन में चूक
बैठक के दौरान Meta ने स्वीकार किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर कुछ तरह के कंटेंट को बढ़ावा मिलने और मॉडरेशन में कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
कंपनी ने यह भी माना कि तकनीकी सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है। हालांकि, कंपनी की ओर से पीएम मोदी की पोस्ट हटने को तकनीकी समस्या बताया गया है।
करोड़ों भारतीय यूजर्स पर पड़ सकता है असर
भारत Meta के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। देश में WhatsApp, Facebook और Instagram के करोड़ों यूजर हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के फैसलों का सीधा असर आम लोगों तक पहुंचता है।
इस विवाद के बाद आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों पर कंटेंट मॉडरेशन, गलत पोस्ट हटाने और यूजर सुरक्षा को लेकर ज्यादा निगरानी बढ़ सकती है।
सरकार और Meta के बीच हुई इस बैठक के बाद यह साफ है कि भारत में काम करने वाली बड़ी टेक कंपनियों को स्थानीय कानूनों और डिजिटल सुरक्षा नियमों का अधिक सख्ती से पालन करना होगा।

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